31 जनवरी 2021 - 17:21
इराक़ में सऊदी अरब की यह काम करने की इच्छा, जम कर उड़ रहा है मज़ाक़... हंसी तो आप को भी आएगी!

इराक़ में चुनाव होने वाले हैं इस इस सिलसिले में सऊदी अरब ने एक एसी मांग रखी है जिस का सोशल मीडिया पर जम कर मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

इराक़ में चुनाव होने वाले हैं और सऊदी अरब ने कहा है कि वह चुनाव की निगरानी करना चाहता है।

इराक़ के अस्सादेक़ून धड़े ने कहा है कि सऊदी अरब में प्रजातंत्र नहीं है उसकी यह हैसियत ही नहीं है कि वह हमारे देश में होने वाले चुनाव की निगरानी करे।

इराक़ के अस्सादेक़ून धड़े के प्रवक्ता महमूद अर्रबीई ने कहा है कि इराक़ के आगामी संसदीय चुनाव की निगरानी वही देश कर सकते हैं जहां प्रजातंत्र हो और सऊदी अरब को तो प्रजातंत्र के अर्थ का भी पता नहीं है और न ही इस देश में चुनाव नाम की कोई चीज़ है इस लिए उसे तो चुनाव जैसे विषय पर अपना मुंह बंद ही रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब एसा देश है जहां जनसंहार और तबाही की नींव पर खड़ी एक तानाशाही सरकार है और इराक़ियों सेन सन 2033 के बाद से इस देश से दुखों और कष्टों के अलावा कुछ नहीं पाया।

इराक़ के अन्नुजबा आंदोलन के सदस्य फरास अलयासिर ने भी कहा है कि इराक़ी जेलों में बंद अधिकांश आतंकवादी फार्स की खाड़ी के अरब देशों के हैं जिनमें सब से अधिक आतंकवादी, सऊदी अरब के हैं।

इराक़ी विशेषज्ञों का कहना है कि इराक़ में सऊदी अरब के लगभग 15 हज़ार आतंकवादियों ने विभिन्न प्रकार की कार्यवाहियां की हैं जिनमें से 5 हज़ार  ने इराक़ में आत्मघाती हमले किये हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार सऊदी अरब ने इन आतंकवादियों या तो भेजा है या फिर उन्हें इराक़ जाकर कार्यवाही की छूट दी है।

इराक़ के चुनाव आयोग ने गत शुक्रवार को बताया था कि दुनिया के बहुत से देश, इराक़ के आगामी संसदीय चुनाव की निगरानी करने में दिलचस्पी रखते हैं।

चुनाव आयोग की प्रवक्ता जमाना अलग़ल्लावी ने बताया कि इराक़ के चुनाव आयोग को सऊदी अबर, जापान, वेनेज़ोएला, फिनलैंड, फिलीपीन, लेबनान, यूनान, भारत और फ्रांस जैसे बहुत से अरब और गैर अरब देशों की ओर से यह संदेश मिला है कि वह इराक़ के संसदीय चुनाव की निगरानी करना चाहते हैं।

जैसे ही खबरों में यह बताया गया कि सऊदी अरब भी इराक़ के चुनाव पर नज़र रखने में दिलचस्पी रखता है सोशल मीडिया पर सऊदी अरब का मज़ाक उड़ाया जाने लगा।

एक इराक़ी ने लिखा कि डेमोक्रेटिक सऊदी अरब इराक़ के चुनाव पर नज़र रखेगा।

बहुत से इराक़ियों ने सऊदी अरब की वह वीडियो क्लिप भी पोस्ट की है जिसमें सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के स्टेचू के सामने सऊदी दरबारी उनके आदेश पालन की प्रतिज्ञा कर रहे हैं और स्टेचू के हाथ पर हाथ रख रहे हैं।

एक इराक़ी ने लिखा है कि यह कलयुग ही है कि इराक़ियों पर एसा दिन आ गया है कि अब आले सऊद उनके चुनाव की निगरानी की मांग कर रहे हैं। इस वीडियो से सऊदी प्रजातंत्र की सच्चाई खुल कर सामने आती है।

 ज़हरा अलहाज नामक एक महिला ने स्टेचू के सामने आज्ञापालन की प्रतिज्ञा करने वाली इसी वीडियो को पोस्ट करके लिखा है मानें या न माने! सऊदी अरब ने इराक़ में चुनाव की निगरानी की इच्छा प्रकट की है।

     एक इराक़ी ने सऊदी अरब के सरकार विरोधी पत्रकार जमाल खाशुकजी की निर्मम हत्या की ओर संकेत करते हुए लिखा है कि एक घंटे पहले तक मैं यह समझ रहा था कि यह खबर मज़ाक है लेकिन जब यक़ीन हुआ तो बड़ी हैरत हुई, चलें ठीक हैं, आरी इस्तेमाल करने वालों को हम इसकी अनुमति दे सकते हैं लेकिन उसके लिए शर्त यह है कि हमारे स्वंय सेवी बल हश्दुश्शाबी को इस बात की अनुमति दी जाए कि वह यह जांच करे कि आपने कैसे जमाल खाशुकजी की लाश को गलाया था ।